विमानों में इस्तेमाल होने वाले इंजनों की कई श्रेणियां होती हैं, जिनमें रेडियल इंजन और जेट इंजन प्रमुख हैं। रेडियल इंजन पुराने पिस्टन-आधारित इंजन होते थे, जबकि जेट इंजन आधुनिक टर्बाइन-आधारित इंजन हैं। दोनों की बनावट, कार्य करने की प्रणाली और उपयोग में बड़ा अंतर होता है। जहां रेडियल इंजन प्रोपेलर से जुड़ा होता है, वहीं जेट इंजन हवा को संपीड़ित करके तेज़ गति से बाहर निकालकर थ्रस्ट उत्पन्न करता है।
रेडियल इंजन क्या है?
रेडियल इंजन एक प्रकार का पिस्टन इंजन होता है, जिसमें कई सिलेंडर एक गोलाकार व्यवस्था में क्रैंकशाफ्ट के चारों ओर लगे होते हैं। यह इंजन आंतरिक दहन प्रक्रिया से काम करता है और पिस्टन की मदद से प्रोपेलर घुमाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था। हालांकि, इसकी गति सीमित होती है और यह अधिक ऊंचाई पर प्रभावी नहीं रहता।
जेट इंजन क्या है?
जेट इंजन एक टर्बाइन-आधारित इंजन होता है, जो हवा को खींचकर उसे संपीड़ित करता है, फिर उसमें ईंधन जलाकर अत्यधिक वेग से बाहर निकालता है। इस प्रक्रिया से थ्रस्ट उत्पन्न होता है, जो विमान को तेज़ी से आगे बढ़ाता है। जेट इंजन उच्च ऊंचाई पर भी कुशलता से काम करता है और इसकी गति रेडियल इंजन की तुलना में कई गुना अधिक होती है।
मुख्य अंतर क्या हैं?
रेडियल इंजन कम गति वाले प्रोपेलर विमानों के लिए उपयुक्त होता है, जबकि जेट इंजन हाई-स्पीड जेट्स और कमर्शियल एयरक्राफ्ट में इस्तेमाल किया जाता है। जेट इंजन की कार्यक्षमता रेडियल इंजन से अधिक होती है और यह लंबी दूरी के लिए बेहतर होता है। आधुनिक विमानन उद्योग में जेट इंजन का अधिक उपयोग किया जाता है, जिससे तेज़ और कुशल हवाई यात्रा संभव हो सकी है।